Union Budget 2020-2021 in Hindi - केन्द्रीय बजट 2020-21 हिंदी मैं

Union Budget 2020  in Hindi: 

Union Budget 2020-2021

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट पिटारे से कई बड़े एलान किया. व्यक्तिगत आयकरदाताओं के लिए सशर्त 5 नए इनकम टैक्स स्लैब का एलान किया गया. वहीं कृषि सेक्टर में कृषि उड़ान की घोषणा हुई. किसानों के लिए बजट में 3 नई स्कीमों का एलान हुआ. इसके अलावा होम लोन लेने वालों, स्टार्टअप को भी राहत प्रदान की गई. डिविडेंड पर टैक्स हटाने का एलान हुआ और LIC का IPO लाने की भी बात कही गई. पिछली बार की तरह इस बार भी बजट ‘बही खाते’ (Bahi Khata) की शक्ल में आया.

Union Budget 2020 (बजट 2020) Live Coverage:

देश की आर्थिक विकास दर 11 साल के निचले स्तर पर है. वित्त वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 4.5 फीसदी पर आ गई थी. वहीं, दिसंबर आखिर तक राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 132 फीसदी हो चुका है. इसका मतलब साफ है कि यदि सरकार ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए अपने खर्च बढ़ाती है तो उसे राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में ढील बरतनी होगी. आर्थिक सर्वेक्षण 2020 में भी इस बात का जिक्र किया गया है.

Budget 2020 in Hindi

पिछले बजट में वित्त मंत्री ने आयकरदाताओं को स्लैब या टैक्स रेट के मोर्चे पर कोई राहत नहीं दी थी. यानी इसमें कोई बदलाव नहीं किया था. हालांकि, सरकार ने टैक्स रिबेट की सीमा 2500 रुपये से बढ़ाकर 12500 रुपये कर दी थी. जिससे 5 लाख रुपये तक की इनकम करमुक्त हो गई.

Union Budget 2020-2021


नई आयकर व्यवस्था में भी वीआरएस में मिलने वाली पांच लाख रुपये तक की राशि पर नहीं लगेगा कोई टैक्‍स


 नई दिल्‍ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बेशक आयकर की नई व्यवस्था (New income tax system) में अब तक मिलने वाली कई रियायतों और छूट को समाप्त करने की घोषणा कर दी है लेकिन सरकार का कहना है कि नई कर व्यवस्था में भी पेंशन, एनपीएस निकासी के अलावा वीआरएस (VRS) में मिलने वाली पांच लाख रुपये तक की राशि पर कर छूट उपलब्ध होगी. वित्त मंत्री ने शनिवार को संसद में पेश 2020-21 के बजट में व्यक्तिगत आयकर ढांचे में व्यापक बदलाव की घोषणा की है. नई कर व्यवस्था में पांच लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले करदाताओं के लिये कर की कम दरों का प्रस्ताव किया गया है. इसके साथ ही वित्त मंत्री ने कई तरह की कर रियायतों और छूट को समाप्त कर दिया. पुरानी कर व्यवस्था में 120 के करीब छूट और रियायतें दी गईं थी इनमें से 70 को हटाया गया है.


Union Budget 2020-2021

नयी कर व्यवस्था के तहत जो कर छूट और रियायतें उपलब्ध होंगी वे इस प्रकार हैं. कृषि से होने वाली आय, अविभाजित हिंदू परिवार के किसी सदस्य को परिवार की संपत्ति से मिलने वाला धन, कंपनी के भागीदार को मिलने वाला लाभ का हिस्सा, प्रवासी भारतीयों को कुछ प्रतिभूतियों-ऋणपत्रों तथा प्रावासी (बाह्य) खाते में रखे धन पर मिलने वाला ब्याज, विदेशी राजनयिकों, दलों तथा प्रशिक्षुओं को होने वाली आय, विदेश में सेवा के बदले किसी भारतीय नागरिक को भारत सरकार से मिलने वाली राशि, मृत्यु तथा सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली ग्रैच्यूटी (सरकारी कर्मचारियों के लिये कोई सीमा नहीं, अन्य के लिये 20 लाख रुपये तक), सेवानिवृत्ति के समय बची छुट्टियों के बदले मिलने वाली नकदी (सरकारी कर्मचारियों के लिये कोई सीमा नहीं, अन्य के लिये तीन लाख रुपये तक).

पीएम मोदी ने बजट 2020 को बताया "विजन और एक्शन" से भरपूर, कहा- अर्थव्यवस्था की नींव होगी मजबूत.
इसके अलावा भोपाल गैस त्रासदी के भुक्तभोगियों को मिलने वाला मुआवजा, किसी आपदा की स्थिति में सरकार से मिलने वाली सहायता राशि, वीआरएस के तहत मिलने वाली पांच लाख रुपये तक की राशि होगी कर मुक्त, जीवन बीमा पॉलिसी से बोनस समेत मिलनी वाली राशि (कुछ शर्तों के साथ), मृत्यु पर बीमा से मिलने वाली राशि (बिना शर्तों के), जीपीएफ या पीपीएफ से मिलने वाला ब्याज, सुकन्या समृद्धि खाते से मिलने वाली राशि, एनपीएस को बंद करने पर मिलने वाला भुगतान व आंशिक निकासी, पेंशन मद में मिलने वाला भुगतान (कुछ शर्तों के साथ), छात्रवृत्ति की राशि, सरकार या सरकारी संस्थान से किसी सम्मान के साथ मिलने वाली राशि, शौर्य सम्मान के तहत मिलने वाली पेंशन, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम अथवा नॉर्थ चाचर हिल्स, मिकिर हिल्स, खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और गारो हिल्स अथवा लद्दाख के जिले के निवासियों को लाभांश के तौर पर या प्रतिभूतियों के ब्याज से होने वाली आय, सिक्किम के निवासियों को सरकार से अथवा लाभांश के तौर पर या प्रतिभूतियों के ब्याज से होने वाली आय.



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कम आय कर दरों के विकल्प पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, हम लोगों के हाथ में पैसा रखना चाहते थे, खासकर मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग. हम आयकर प्रक्रिया को आसान बनाना चाहते थे और अनुपालन को बढ़ाना चाहते थे. कॉरपोरेट टैक्स में कटौती और नई कंपनियों को दिए जाने वाले लाभ के साथ-साथ जीएसटी संग्रह में सुधार से राजस्व सृजन में सुधार होगा. इससे अगले साल राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद मिलेगी और विनिवेश में भी सुधार आएगा.

ICICI लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एमडी एंड सीईओ भार्गव दासगुप्ता का कहना है कि यह लॉन्ग टर्म में ग्रोथ को बढ़ावा देने और राजकोषीय प्रबंधन में संतुलन बनाने वाला बजट रहा. इंफ्रा डेवलपमेंट, उच्च शिक्षा, तकनीकी आदि के लंबी अवधि के नजरिया है, जो कि सकारात्मक कदम है. आयुष्मान भारत के लिए हॉस्पिटल नेटवर्क का विस्तार करने से हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज को बूस्ट मिलना चाहिए.

बजट पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, जो बड़े उद्योगपति टैक्स में चोरी करते हैं उन्हें बड़ी राहत दी गई है, अब उन्हें पेनल्टी और ब्याज भी नहीं देना पड़ेगा. इतने लंबे चौड़े भाषण के दौरान बेरोजगारी और महंगाई शब्द सुनने को नहीं मिले. हर साल की तरह इस बार भी पूंजीपतियों को राहत देनी की बात की गई है लेकिन किसान, मजदूर को राहत देने में इनकी अर्थव्यवस्था बिगड़ जाती है. ये भारतीय जनता पार्टी का नहीं बल्कि भारतीय बिजनेस मैन पार्टी का बजट है.

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पीएम मोदी ने कहा- बजट में विजन भी, एक्शन भी; इनकम और इन्वेस्टमेंट बढ़ाएगा


भारत सरकार ने 2020-21 के लिए आम बजट पेश कर दिया है. इस बजट में देश से बाहर रहने वाले भारतीयों (NRI) के लिए विशेष प्रावधान किए हैं. नए प्रावधान के अनुसार अब जो भारतीय विदेश में रहते हुए टैक्स नहीं देता है उसे भारत में कर का भुगतान करना होगा. इसके लिए किसी भी भारतीय को दूसरे देश में 182 दिनों की तुलना में 240 दिनों तक रहना होगा. आयकर अधिनियम की धारा 6 में संशोधन करते हुए, बजट ने प्रस्तावित किया कि "क्लॉज (1) में कुछ भी नहीं होने के बावजूद, एक व्यक्ति - भारत का नागरिक होने के नाते - किसी भी पिछले वर्ष में भारत में निवासी माना जाएगा, यदि वह किसी अन्य देश या क्षेत्र में उसके निवास या समान प्रकृति के किसी भी अन्य मानदंड के कारण कर के लिए उत्तरदायी नहीं है.


Budget 2020: अल्पसंख्यकों पर मेहरबान मोदी सरकार, 6 साल में 1500 करोड़ रुपये बढ़ाया बजट


सरकार ने कहा कि उसने एनआरआई टैग के अनुसार प्रावधानों को बदल दिया है ताकि लोगों को देश की कर प्रणाली में खामियों का फायदा उठाने से रोका जा सके. "हमने इनकम टैक्स (सिस्टम) में बदलाव किया है. इससे पहले, एक भारतीय नागरिक एनआरआई बन जाता है अगर वह 182 दिनों से अधिक समय तक देश से बाहर रहता है. अब उसे 241 दिनों तक रहना है. समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से कहा गया है कि कुछ लोग किसी देश के निवासी नहीं थे. हमने कहा है कि यदि कोई भारतीय नागरिक, अगर वह भारत का नागरिक नहीं है, तो उसे भारत का नागरिक माना जाता है और उसकी दुनिया भर में होने वाली आय पर कर लगेगा.
Union Budget 2020-2021


बजट 2020 को लेकर स्मृति ईरानी का राहुल गांधी पर तंज, पूछा- क्या उन्हें समझ भी आया?

बता दें कि केंद्र सरकार ने  नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जिस वक्त देश में मुस्लिम समुदाय का एक तबका सड़कों पर है, ठीक उस दौरान पेश हुए बजट में मोदी सरकार (Modi Govt) ने अल्पसंख्यकों का खासा ख्याल रखा है. मोदी सरकार ने पिछली बार की तुलना में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का बजट 329 करोड़ रुपये बढ़ाया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने शनिवार को पेश बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए 5029 करोड़ का बजट दिया है, जबकि पिछले साल 4700 करोड़ रुपये का बजट था.

अब तक मोदी सरकार की ओर से पेश सभी बजट पर नजर डालें तो 6 साल के कार्यकाल में अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट 1500 करोड़ रुपये तक बढ़ चुका है. भाजपा सूत्रों का कहना है कि सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मूलमंत्र के साथ काम कर रही है. ऐसे में अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बढ़ोतरी पर किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए. अगर बजट के आंकड़ों की बात करें तो 2014 में मोदी सरकार से पहले यूपीए शासनकाल में पेश हुए 2013-14 के बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए 3511 करोड़ की व्यवस्था की गई थी.

इसके बाद जब मोदी सरकार में 10 जुलाई 2014 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहला बजट पेश किया तो अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट में 200 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर 3711 करोड़ कर दिया था. अगले साल 2015-16 में बढ़ाकर 3713 करोड़ कर दिया. इसके बाद भी हर साल मोदी सरकार अल्पसंख्यकों पर  मेहरबान होकर बजट बढ़ाती रही. मिसाल के तौर पर, 2016-17 में 3800 करोड़ रुपये, 2017-18 में 4195 करोड़, 2018-19 में 4700 करोड़ रुपये का बजट जारी किया.

बजट में सरकार का बड़ा ऐलान- बेचेगी LIC की हिस्सेदारी

2019-20 में भी सरकार ने 2018-19 के बराबर यानी 4700 करोड़ रुपये का ही बजट जारी किया था. अब शनिवार को पेश हुए 2020-21 के बजट में 5029 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है. इस प्रकार देखें तो मोदी सरकार करीब 6 साल से अपने कार्यकाल में अब तक 1500 करोड़ रुपये अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए बढ़ा चुकी है. बजट बढ़ाए जाने से अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का स्टाफ खुश है. मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार ने बजट बढ़ाकर फिर दिखाया है कि वह सबको साथ लेकर चलने में यकीन रखती है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) ने अपने एक बयान में इसे बहुत प्रैक्टिकल बजट बताया है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में इसे 'पीपुल फ्रेंडली' बजट बताते हुए कहा कि इसमें गांव, किसान, खेत, खलिहान सहित सभी का ध्यान रखा गया है.

Budget 2020: NRI को बजट से झटका,  विदेश में टैक्स न देने वालों को भारत में देना होगा टैक्स 

नए प्रावधान के अनुसार अब जो भारतीय विदेश में रहते हुए टैक्स नहीं देता है उसे भारत में कर का भुगतान करना होगा. इसके लिए किसी भी भारतीय को दूसरे देश में 182 दिनों की तुलना में 240 दिनों तक रहना होगा.

खास बातें
  1. केंद्र सरकार ने पेश किया बजट
  2. एनआरआई लोगों पर भी लगाया गया टैक्स
  3. भारत आकर देना होगा टैक्स
नई दिल्ली: भारत सरकार ने 2020-21 के लिए आम बजट पेश कर दिया है. इस बजट में देश से बाहर रहने वाले भारतीयों (NRI) के लिए विशेष प्रावधान किए हैं. नए प्रावधान के अनुसार अब जो भारतीय विदेश में रहते हुए टैक्स नहीं देता है उसे भारत में कर का भुगतान करना होगा. इसके लिए किसी भी भारतीय को दूसरे देश में 182 दिनों की तुलना में 240 दिनों तक रहना होगा. आयकर अधिनियम की धारा 6 में संशोधन करते हुए, बजट ने प्रस्तावित किया कि "क्लॉज (1) में कुछ भी नहीं होने के बावजूद, एक व्यक्ति - भारत का नागरिक होने के नाते - किसी भी पिछले वर्ष में भारत में निवासी माना जाएगा, यदि वह किसी अन्य देश या क्षेत्र में उसके निवास या समान प्रकृति के किसी भी अन्य मानदंड के कारण कर के लिए उत्तरदायी नहीं है.
 

सरकार ने कहा कि उसने एनआरआई टैग के अनुसार प्रावधानों को बदल दिया है ताकि लोगों को देश की कर प्रणाली में खामियों का फायदा उठाने से रोका जा सके. "हमने इनकम टैक्स (सिस्टम) में बदलाव किया है. इससे पहले, एक भारतीय नागरिक एनआरआई बन जाता है अगर वह 182 दिनों से अधिक समय तक देश से बाहर रहता है. अब उसे 241 दिनों तक रहना है. समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से कहा गया है कि कुछ लोग किसी देश के निवासी नहीं थे. हमने कहा है कि यदि कोई भारतीय नागरिक, अगर वह भारत का नागरिक नहीं है, तो उसे भारत का नागरिक माना जाता है और उसकी दुनिया भर में होने वाली आय पर कर लगेगा. समाचार एजेंसी पीटीआई ने राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय के हवाले से यह कहा है.

बता दें कि केंद्र सरकार ने  नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर जिस वक्त देश में मुस्लिम समुदाय का एक तबका सड़कों पर है, ठीक उस दौरान पेश हुए बजट में मोदी सरकार (Modi Govt) ने अल्पसंख्यकों का खासा ख्याल रखा है. मोदी सरकार ने पिछली बार की तुलना में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय का बजट 329 करोड़ रुपये बढ़ाया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने शनिवार को पेश बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए 5029 करोड़ का बजट दिया है, जबकि पिछले साल 4700 करोड़ रुपये का बजट था.
Union Budget 2020-2021

अब तक मोदी सरकार की ओर से पेश सभी बजट पर नजर डालें तो 6 साल के कार्यकाल में अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट 1500 करोड़ रुपये तक बढ़ चुका है. भाजपा सूत्रों का कहना है कि सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मूलमंत्र के साथ काम कर रही है. ऐसे में अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में बढ़ोतरी पर किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए. अगर बजट के आंकड़ों की बात करें तो 2014 में मोदी सरकार से पहले यूपीए शासनकाल में पेश हुए 2013-14 के बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए 3511 करोड़ की व्यवस्था की गई थी.

 
इसके बाद जब मोदी सरकार में 10 जुलाई 2014 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहला बजट पेश किया तो अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट में 200 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर 3711 करोड़ कर दिया था. अगले साल 2015-16 में बढ़ाकर 3713 करोड़ कर दिया. इसके बाद भी हर साल मोदी सरकार अल्पसंख्यकों पर  मेहरबान होकर बजट बढ़ाती रही. मिसाल के तौर पर, 2016-17 में 3800 करोड़ रुपये, 2017-18 में 4195 करोड़, 2018-19 में 4700 करोड़ रुपये का बजट जारी किया.


बजट में सरकार का बड़ा ऐलान- बेचेगी LIC की हिस्सेदारी

 
2019-20 में भी सरकार ने 2018-19 के बराबर यानी 4700 करोड़ रुपये का ही बजट जारी किया था. अब शनिवार को पेश हुए 2020-21 के बजट में 5029 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है. इस प्रकार देखें तो मोदी सरकार करीब 6 साल से अपने कार्यकाल में अब तक 1500 करोड़ रुपये अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए बढ़ा चुकी है. बजट बढ़ाए जाने से अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का स्टाफ खुश है. मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार ने बजट बढ़ाकर फिर दिखाया है कि वह सबको साथ लेकर चलने में यकीन रखती है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) ने अपने एक बयान में इसे बहुत प्रैक्टिकल बजट बताया है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में इसे 'पीपुल फ्रेंडली' बजट बताते हुए कहा कि इसमें गांव, किसान, खेत, खलिहान सहित सभी का ध्यान रखा गया है.



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